• स्वतंत्र | विशेषण • स्वतन्ट्र |
at: ऐट स् पर में से की | |
liberty: आजादी छुटकारा | |
at liberty मीनिंग इन हिंदी
at liberty उदाहरण वाक्य
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- The rest of the accused are acquitted and to be set at liberty .
बाकी सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया गया है और उन्हें रिहा करने का आदेश दिया जाता है . - Since India restricts futures trading in petroleum , Dabhol is not at liberty to hedge .
चूंकि भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की पहले खरीद की इजाजत नहीं है , इसलिए ड़ीपीसी के हाथ बंधे हैं . - There are three charges : you are at liberty to acquit or convict on all three or acquit or convict on any two of the charges .
तीन अभियोग हैं : इन तीनों पर या इनमें से किसी दो पर दोषी या निर्दोषी ठहराने की आपको पूरी आजादी है . - There are , probably , few people in India who do not sincerely regret that you should have made it impossible for any government to leave you at liberty .
भारत में ऐसे लोग बहुत कम होंगे , जिन्हें वाकई इस बात का पछतावा हो कि सरकार ने आपकों मुक़्त नहीं रखा . - The Government immediately arrested all the leaders who were still at liberty including the President-elect Madan Mohan Malavi-ya .
इस पर सरकार ने अभी तक आजाद शेष नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया , जिनमें अधिवेशन के निर्वाचित अध्यक्ष पंडित मदनमोहन मालवीय भी थे . - After the sun has risen , he is at liberty to break the fast at that moment if he likes , or , if he prefers , he may postpone it till noon .
सूर्योदय हो जाने के बाद वह चाहे तो उसी क्षण व्रत खोल सकता है और यदि उसकी इच्छा अन्यथा हो तो उस दिन दोपहर तक उसे टाल भी सकते हैं . - When the British authorities came to know of his plans , they sent him a written warning through the British Consul in Vienna to the effect that if he returned to India , he could not expect to remain at liberty .
ब्रिटिश अधिकारियों को उनके कार्यक्रम का आभास मिला तो उन्होंने विएना स्थित ब्रिटिश वाणिजयदूत की मार्फत उन्हें चेतावनी दी कि भारत लौटकर वे मुक़्त विचरने की अपेक्षा न करें . - You profess in your affidavit to justify your offence by putting forward as the basis of your false charges against Mr Justice Norris , a statement in the Brahmo Public Opinion which you say you believed to be true and upon which you considered yourself at liberty to enlarge and comment with extreme severity .
तुमने अपने हलफनामे में अपने अपराध का यह कह कर औचित्य बताने का प्रयास किया है कि न्यायाधीश श्री नौरिस पर तुम्हारे द्वारा लगाये गये आरोप ' ब्रह्यो पब्लिक ओपीनियन ' की रिपोर्ट पर आधारित थे , जिन्हें तुम सही समझते थे और जिन्हें बढ़ा-चढ़ाकर तुमने इतनी सख्त टिप्पणी करने की धृष्टता की . - ” The judges are at a loss to understand how a libel so gross could possibly have been inserted in your paper in good faith ' and they find great difficulty in believing that a gentleman of your education , and a newspaper editor , could be so utterly ignorant of the law of libel as to suppose that you were at liberty to publish these attacks upon the conduct and character of a High Court judge , merely because you found them , though in a less virulent form , in another native newspaper .
उन्हें यह मानने में भी बड़ी कठिनाई हो रही है कि तुम्हारे जैसा शिक्षित व्यक्ति , एक पत्र का संपादक , अभियोग के कानून से कैसे इतना अंजान हो सकता है कि केवल इस आधार पर एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के आचरण और चरित्र पर इन आरोपों को प्रकाशित करे कि वे पहले किसी देशी अखबार में कम विषाक्त रूप में छप चुके हैं . - Sceptics and prejudiced or interested witnesses in general may scoff as they like , the fact cannot be gainsaid . Our friendsand we have some who regard us neither as lunatics nor imposterswill at least be glad to read the statement which follows ; . .. We are no . more at liberty to repeat here all the questions put to us by the interviewers than we are to divulge certain other facts which would still more strongly corroborate our repeated assertions -LRB- hat -LRB- 1 -RRB- Our Society was founded at the direct suggestion of Indian and Tibetan Adepts ; and -LRB- 2 -RRB- that in coming to this country we but obeyed their wishes .
पर हमें न तो पागल करार देते हैं , न ही धोखेबाज मानते हैं-कम-से-कम निम्नाकिंत वक़्तव्य को पढ़कर खुश तो हो ही सकते हैं . . . हमें यहां उन प्रश्नों को दोहराने की छूट नहीं है जो साक्षात्कारकर्ताओं ने हमसे पूछे , बल्कि यहां कुछ ऐसे तथ्यों को प्रस्तुत करना चाहते हैं जो हमारे उन निश्चयों का समर्थन करेंगे कि ( 1 ) हमारा समाज भारतीय तथा तिब्बती संतो के सुझाव पर स्थापित किया गया , तथा ( 2 ) इस देश मे आते हुए हमने केवल उनके आदेशों का पालन किया है